मुंबई – सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली. बीएसई सेंसेक्स 1000 अंकों से अधिक टूटकर 72,900 के नीचे पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50,300 से ज्यादा अंक गिरकर 22,850 के स्तर से नीचे फिसल गया. इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी आई.
सेंसेक्स 1,124 अंक गिरकर 72,771.72 पर और निफ्टी 360 अंक टूटकर 22,780.25 पर बंद हुआ। इस बिकवाली के कारण BSE पर लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन से लगभग 8 लाख करोड़ रुपये कम हो गए, जिससे यह घटकर करीब 474 लाख करोड़ रुपए रह गया. सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 29 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. बेंचमार्क इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट L&T और Power Grid के शेयरों में देखी गई, जो लगभग 3 फीसदी तक गिरे. अडानी पोर्ट, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एसबीआई के शेयरों में 2% से ज्यादा की गिरावट आई. इस ट्रेंड के उलट, इंफोसिस एकमात्र ऐसा शेयर था जो बढ़त के साथ बंद हुआ.सभी सेक्टर इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए, जिसमें निफ्टी पीएसयू बैंक में 3% से ज़्यादा और निफ्टी रियलटी में 2% से ज़्यादा की गिरावट आई. निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी मेटल, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी रियलटी में 1-2% की गिरावट देखी गई. कुल मिलाकर बाज़ार का रुख काफी नकारात्मक रहा. एनएसई पर 869 शेयरों में बढ़त के मुकाबले 2,716 शेयरों में गिरावट देखी गई, जबकि 91 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर शेयर बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण कौन से हैं…
बाजार में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह ईरान-अमेरिका तनाव को माना जा रहा है. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों पर दबाव बढ़ने की आशंका है.इसके अलावा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है. अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.2 प्रतिशत के ऊपर पहुंच गई है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने हाल के सत्रों में भारतीय शेयरों में भारी बिकवाली की है.
रुपये में कमजोरी और एशियाई बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों ने भी निवेशकों का भरोसा कमजोर किया. बैंकिंग, वित्तीय, ऑटो, एफएमसीजी और रियल्टी समेत लगभग सभी सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक ब्याज दरों में नरमी नहीं आती, तब तक भारतीय बाजारों पर दबाव बना रह सकता है.बाजार में चौतरफा बिकवाली हुई, जिसमें निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में लगभग 2% की गिरावट आई. बाज़ार में उतार-चढ़ाव को मापने वाला इंडेक्स इंडिया विक्स लगभग 12 फीसदी बढ़कर 14 के करीब पहुंच गया.
दलाल स्ट्रीट के लिए आगे क्या है?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि बाजार के एक अहम साइकोलॉजिकल सपोर्ट लेवल को तोड़ने के साथ ही ‘बेयर्स’ (गिरावट की उम्मीद करने वाले) का दबदबा बना रहा. यह ग्लोबल मैक्रो हालात बिगड़ने के बीच निवेशकों की बढ़ती सावधानी को दिखाता है.उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा सीजफायर (युद्धविराम) के प्रस्ताव को ठुकराने से चिंताएं बढ़ गई हैं कि पश्चिम एशिया में तनाव उम्मीद से ज्यादा समय तक बना रह सकता है. इससे जल्द कूटनीतिक समाधान की संभावना कम हो गई है और लंबे समय तक सप्लाई-साइड में रुकावट और कमोडिटी की कीमतें बढ़ने का जोखिम बढ़ गया है.
नायर ने कहा कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भारत-अमेरिका यील्ड स्प्रेड कम हो रहा है, जिससे विदेशी फंड की निकासी हो सकती है और बाजार का मूड सतर्क बना रह सकता है. साथ ही, फेड द्वारा ब्याज दरें और बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदों के बीच जोखिम का दोबारा आकलन करते हुए निवेशकों ने सभी सेक्टर में बिकवाली की.एनालिस्ट ने आगे कहा कि RBI के आगामी पॉलिसी फैसले से पहले बाजार के लोग सतर्क रह सकते हैं. साथ ही, ग्लोबल लिक्विडिटी की स्थिति, बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव, तेल की कीमतें और पॉलिसी से जुड़े संकेत निकट भविष्य में बाजार की धारणा को तय करेंगे.



