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चूहों को मारने में फूंके 25 लाख से ज्यादा, फिर भी नहीं थमा आतंक, आंबेडकर अस्पताल में अब दोबारा होगा टेंडर

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रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में चूहों की समस्या पर 25 लाख से ज्यादा खर्च के बाद भी राहत नहीं मिली। अब चूहों के नियंत्रण के लिए दोबारा टेंडर किया जाएगा।

रायपुर – छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल में चूहों का आतंक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने पिछले 12 वर्षों के दौरान चूहों के खात्मे पर 25 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च कर दी है। इसके बावजूद विभिन्न वार्डों, आईसीयू, मुख्य दवा स्टोर और रसोईघर में चूहों का उपद्रव जारी है। यह स्थिति न केवल महंगी चिकित्सीय मशीनों और उपकरणों के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है, बल्कि मरीजों में गंभीर संक्रमण का खतरा भी बढ़ा रही है। अलग-अलग विभागों से आ रही शिकायतों को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन अब नए सिरे से पेस्ट कंट्रोल का टेंडर निकालने की तैयारी कर रहा है।

बारह साल में निष्फल साबित हुए प्रयास
अस्पताल प्रशासन ने 12 साल पहले पहली बार चूहों को मारने के लिए 15 लाख रुपये का टेंडर जारी किया था। उस समय राज्य के किसी भी सरकारी अस्पताल में चूहों के खात्मे के लिए टेंडर निकालना पहली घटना थी। इसके बाद के वर्षों में भी इस समस्या से निपटने के लिए 10 लाख रुपये से अधिक की राशि अतिरिक्त रूप से खर्च की गई। विभिन्न वार्डों, रसोई और दवा स्टोर में चूहों को रोकने के लिए विशेष जालियों और जेल तकनीक का सहारा लिया गया। इसके साथ ही रसोईघर के आसपास के गड्ढों में चूहामार दवाइयां भी डाली गईं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं मिल सका।

अस्पताल में करीब 10 से 15 हजार चूहे मारने का दावा
वर्ष 2011 में पेस्ट कंट्रोल करने वाली एजेंसी ने दावा किया था कि उसने अस्पताल में करीब 10 से 15 हजार चूहे मारे हैं। हालांकि, इस आंकड़े की पुष्टि के लिए कोई वैज्ञानिक तकनीक नहीं अपनाई गई थी और यह केवल एक अनुमान था। इस कार्रवाई का असर महज एक महीने तक ही रहा। इसके बाद चूहों ने दोबारा मुख्य रसोईघर, दवा स्टोर और आईसीयू में प्रवेश कर लाखों रुपये मूल्य की दवाइयों और खाद्य सामग्रियों को नुकसान पहुंचाया। अब प्रस्तावित नए टेंडर में चूहों के साथ-साथ कॉकरोच और दीमक के खात्मे को भी शामिल किया जाएगा, क्योंकि रेडियो डायग्नोसिस विभाग के विभागाध्यक्ष के कक्ष की दीवारों में दीमक का प्रकोप बढ़ चुका है।

शव कुतरने की घटना और सुरक्षा की चुनौती
आंबेडकर अस्पताल में चूहों के कारण पहले भी कई गंभीर विवाद खड़े हो चुके हैं। लगभग छह साल पहले मर्चुरी कक्ष में रखे एक शव को चूहों द्वारा कुतरने का मामला सामने आया था। परिजनों के कड़े विरोध और मामला मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचने के बाद फोरेंसिक मेडिसिन के विभागाध्यक्ष का तबादला सिम्स बिलासपुर कर दिया गया था।

हालांकि, अस्पताल के एनआईसीयू या अन्य वार्डों में भर्ती किसी मरीज को चूहों द्वारा काटे जाने की घटना अब तक दर्ज नहीं हुई है। इसके विपरीत पड़ोसी राज्य के इंदौर स्थित एमवाय अस्पताल में पिछले वर्ष एनआईसीयू में चूहों के कुतरने से दो मासूम बच्चों की 2 और 3 सितंबर को मौत हो गई थी। आंबेडकर अस्पताल प्रबंधन अब मशीनों और उपकरणों को सुरक्षित रखने के लिए नए सिरे से प्रभावी कदम उठा रहा है।