चीन के तिब्बत में हुए हिमस्खलन का असर पूरे हिमालयी क्षेत्र में अभी भी दिख रहा है। स्थिति यह है कि नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई तीव्र बाढ़ की चपेट में आने वालों का आंकड़ा अभी भी ठीक-ठीक स्पष्ट नहीं है। बीते चार दिनों से लगातार हादसे का शिकार हुए लोगों की खोज जारी है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 768 शव बरामद कर लिए गए हैं। वहीं, करीब ढाई हजार लोग अभी भी लापता हैं। इनमें सैकड़ों भारतीय और भारतीय मूल के लोग शामिल हैं।
नेपाल में प्राकृतिक आपदा के बाद अभी कैसे हैं हालात?
26 अगस्त (बुधवार) को नेपाल भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल में रविवार सुबह तक के ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हालात अत्यंत गंभीर, चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील बने हुए हैं। आपदा के बाद राहत-बचाव कार्य और शवों के प्रबंधन में सुरक्षाबलों को लगाया गया है। इसके बावजूद समस्याएं बड़े स्तर पर फैली हैं।
- बाढ़ की वजह से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 734 हो गई है। सबसे ज्यादा शव नदी के बहाव क्षेत्र में सैकड़ों किलोमीटर दूर नीचे बसे जिलों से बरामद किए गए हैं। इनमें चितवन (259 शव) और नवलपरासी पूर्व (184 शव) सबसे आगे हैं।
- अभी भी 2,498 लोग लापता हैं। इस सूची में 933 जलविद्युत परियोजना के कर्मचारी, 589 विदेशी नागरिक और उनके साथ यात्रा कर रहे 127 नेपाली शामिल हैं। इसके अलावा सेना के 45, पुलिस के 40 सुरक्षाकर्मी भी लापता हैं।
- अब तक सुरक्षाबलों की ओर से 8,186 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। इनमें जलविद्युत परियोजना की सुरंगों में फंसे 279 लोग और 227 विदेशी पर्यटक शामिल हैं जिन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए निकाला गया। आपदा में 242 लोग घायल हुए हैं।
आपदा के बाद अब किस संकट से जूझ रहे नागरिक?
बाढ़ के भीषण प्रकोप से किसी तरह बच निकले नेपाल के नागरिक अब एक दोहरे और बेहद गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहे हैं। बुनियादी जरूरतों की भारी कमी और अव्यवस्था के कारण विस्थापित लोगों के शिविरों और बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।






