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दिल्ली में H1N1 के बीच बढ़ी कोविड निगरानी, टेस्ट और रिपोर्ट पर ICMR ने दिए अस्पतालों को निर्देश

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नई दिल्ली – राजधानी में एच1एन1 के बढ़ते मामलों के बीच अब कोविड-19 की निगरानी भी तेज कर दी गई है। इन्फ्लुएंजा लाइक इलनेस (आइएलआइ) और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस (एसएआरआइ) वाले मरीजों की पहचान और निगरानी के साथ कोविड संक्रमण पर भी नजर रखी जा रही है।

अस्पतालों से मिलने वाली जानकारी इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आइडीएसपी) के इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफार्मेशन प्लेटफार्म (आइएचआइपी) पर रिपोर्ट की जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने जुलाई में राज्यसभा में जानकारी दी कि आइएलआइ, एसएआरआइ और कोविड-19 की निगरानी आइडीएसपी-आइएचआइपी के माध्यम से की जा रही है।

नियमित रूप से रिपोर्टिंग करने का भी निर्देश

2025 का आदेश, एच1एन1 बढ़ने पर अब निगरानी तेज केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 29 मई 2025 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आइएलआइ, एसएआरआइ और कोविड की निगरानी के संबंध में निर्देश दिए थे।

इसमें सभी एसएआरआइ मरीजों की कोविड जांच और आइएलआइ के पांच प्रतिशत मरीजों के नमूनों की कोविड जांच करने को कहा गया था। कोविड से संबंधित आंकड़ों की आइडीएसपी-आइएचआइपी पर नियमित रूप से रिपोर्टिंग करने का भी निर्देश था।

अब एच1एन1 के मामले बढ़ने के बाद अस्पतालों में इस व्यवस्था के पालन और रिपोर्टिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। लक्षण लगभग एक जैसे, जांच जरूरी कोविड-19 और एच1एन1 दोनों श्वसन संक्रमण हैं। दोनों में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, शरीर में दर्द, सिरदर्द और थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं।

इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर दोनों संक्रमणों में अंतर करना मुश्किल होता है। गंभीर मरीजों में संक्रमण की सही पहचान के लिए प्रयोगशाला जांच जरूरी है।

जांच का तरीका मिलता-जुलता, वायरस अलग दोनों संक्रमणों की जांच के लिए नाक या गले से श्वसन नमूना लिया जाता है और आरटी-पीसीआर आधारित आणविक जांच का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, जांच एक जैसी नहीं होती।

कोविड में सार्स-सीओवी-2 के आनुवंशिक हिस्से की पहचान होती है, जबकि एच1एन1 में इन्फ्लुएंजा-ए वायरस की पहचान की जाती है। मल्टीप्लेक्स आरटी-पीसीआर से एक ही नमूने में इन्फ्लुएंजा ए, इन्फ्लुएंजा बी और सार्स-सीओवी-2 की एक साथ पहचान भी संभव है।

एसएआरआइ मरीजों पर विशेष नजर अस्पताल में सांस की गंभीर बीमारी के कारण भर्ती मरीजों में सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस (एसएआरआइ) की निगरानी की जाती है। केंद्रीय व्यवस्था में ऐसे मरीजों की कोविड जांच का प्रावधान है।

2025 के निर्देश में सभी एसएआरआइ और आइएलआइ के पांच प्रतिशत मामलों के नमूनों की कोविड जांच तथा संबंधित आंकड़ों को आइडीएसपी-आइएचआइपी पर दर्ज करने को कहा गया था।

गंभीर मरीजों के उपचार की तैयारी गंभीर एसएआरआइ मरीजों में समय पर आक्सीजन और अन्य श्वसन सहायता उपलब्ध कराने पर जोर है। हालत गंभीर होने पर वेंटिलेटर से उपचार की व्यवस्था रखी जाती है।

कोविड और सांस के मरीजों की निगरानी तेज

अस्पतालों को मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति में आक्सीजन, वेंटिलेटर और जांच सुविधाओं की उपलब्धता बनाए रखने पर भी ध्यान देना होगा। बढ़ोतरी पर आरआरटी करेगी जांच आइडीएसपी के तहत मामलों में असामान्य वृद्धि मिलने पर जिला और राज्य निगरानी इकाइयां इसकी समीक्षा करती हैं।

जरूरत पड़ने पर रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) जांच करती है। अस्पतालों में कोविड की निगरानी तेज होने का अर्थ दिल्ली में कोविड की नई लहर आना नहीं है। इसका उद्देश्य एच1एन1, कोविड और अन्य श्वसन संक्रमणों में मामलों की असामान्य बढ़ोतरी का समय रहते पता लगाना है।