यह फार्म दुर्ग-भिलाई और पड़ोसी राज्यों में सूअर मांस की आपूर्ति का प्रमुख केंद्र था। सूअरों की लगातार मौत होने पर फार्म मालिक ने पशुपालन विभाग को सूचना दी। विभाग ने सूअरों के सैंपल भोपाल की हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज लैब भेजे।
रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई की। फार्म मालिक के अनुसार, उनके फार्म में लगभग चार सौ सूअर पल रहे थे। 29 मार्च को पहला सैंपल लिया गया था और एक अप्रैल से सूअरों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया। रिपोर्ट आने तक सैकड़ों सूअरों की मौत हो चुकी थी। इस बीमारी से फार्म मालिक को करोड़ों रुपये का बड़ा नुकसान हुआ है। विभाग ने फार्म को सील कर दिया है।
पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर वसीम शम्स ने अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद संक्रमित सूअरों को नष्ट किया गया। यह बीमारी केवल सूअरों को प्रभावित करती है और अन्य जानवरों या इंसानों में नहीं फैलती। विभाग ने सूचना मिलने पर पूरी सतर्कता से काम किया।
अफ्रीकन स्वाइन फीवर का खतरा
इस जानलेवा बीमारी का कोई इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसके प्रसार को रोकने के लिए संक्रमित सूअरों को नष्ट करना आवश्यक होता है। यह वायरस एक सूअर से दूसरे सूअर में तेजी से फैलता है। बीमारी के कारण सूअर पालन उद्योग को भारी आर्थिक हानि होती है।






