कोयला घोटाला मामले के आरोपी रायपुर सेंट्रल जेल में बंद है. इसके पहले जुलाई 2024 में 15 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया था.
रायपुर – मंगलवार को EOW ACB ने छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला मामले में कोयला लेवी प्रकरण की जांच को आगे बढ़ाते हुए 1200 पेज का पूरक चालान पेश किया है. कोयला घोटाला मामले के आरोपी रायपुर सेंट्रल जेल में बंद है. इसके पहले जुलाई 2024 में 15 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया था, जिसमें सौम्या चौरसिया, रानू साहू, समीर बिश्नोई, शिव शंकर नाग, संदीप कुमार नायक, सूर्यकांत तिवारी, निखिल चंद्राकर, लक्ष्मीकांत तिवारी, हेमंत जायसवाल, चंद्र प्रकाश जायसवाल, शेख मोइनुद्दीन कुरैशी, पारेख कुर्रे, राहुल सिंह, रोशन कुमार सिंह और वीरेंद्र जायसवाल के खिलाफ कोल लेवी प्रकरण में प्रथम चालान प्रस्तुत किया गया था.
अक्टूबर 2024 में दो आरोपियों के खिलाफ जिसमें मनीष उपाध्याय और रजनीकांत तिवारी. अक्टूबर 2025 में दो आरोपियों के खिलाफ जिसमें देवेंद्र डडसेना और नवनीत तिवारी के खिलाफ चालान पेश हुआ था. दिसंबर 2025 में एक आरोपी जयचंद कोसले के खिलाफ पूरक चालान प्रस्तुत किया गया था.
ऐसे हुआ कोल लेवी स्कैम
EOW ACB की जांच में यह तथ्य सामने आया कि कोल लेवी की रकम नकद में वसूली जाती थी, जिनके पास कैश में रकम देने को नहीं होता था उनके लिए सूर्यकांत तिवारी ने शेल फर्मों की व्यवस्था कराई थी. इसमें आरोपी ने कोयला लेवी से प्राप्त अवैध राशि को वैध स्वरूप देने के उद्देश्य से विभिन्न फार्मो और बैंक खातों का उपयोग किया. आरोपी द्वारा कई शेल फर्मो के माध्यम से बैंकिंग चैनलों के जरिए कम से कम 40 करोड़ रुपए की धनराशि का रूटिंग और लेयरिंग कर उसे कैश में परिवर्तित कर सूर्यकांत तिवारी तक पहुंचने की व्यवस्था की जाती थी. इस प्रक्रिया में फर्जी बिलिंग विभिन्न व्यावसायिक मदों के नाम पर भुगतान और अनेक खातों में राशि राशि स्थानांतरित कर वास्तविक स्त्रोत को छिपाने का प्रयास किया गया.
इससे पहले आरोपी राकेश जैन के खिलाफ रायपुर पुलिस में तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिसमें एक मामले में चालान पेश किया जा चुका है. इसके साथ ही दो मामले विचाराधीन हैं. EOW ACB के दूसरे अपराध जिसमें शराब घोटाला में भी आरोपी ने अनवर ढेबर से संबंधित व्यक्तियों एवं विभिन्न फर्म को भी अपनी अवैध नेटवर्क से बैंक एंट्री दी है. अवैध धनराशि की लेयरिंग में सहयोग किया है. जांच में यह भी पाया गया है कि संबंधित कंपनियों से बड़ी मात्रा में धनराशि विभिन्न व्यक्तियों फर्मों जिसमें अनवर ढेबर से संबंधित फर्म और आर ए कॉरपोरेशन, स्टार ट्रेडर्स, महावीर इंटरप्राइजेज, सृष्टि मिनरल्स, मार्श इंटरप्राइजेज, सोमवती सेल्स और आर्य इंटरप्राइजेज के खातों में स्थानांतरित की गई. इसके बाद राशि को चरणबद्ध तरीके से निकलकर अवैध नेटवर्क से सूर्यकांत तिवारी तक पहुंचाया जाता था.






