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रविवार को भाद्रपद पूर्णिमा तिथि पर चंद्रग्रहण – चंद्रग्रहण के बीच कैसे करें श्राद्ध का तर्पण? गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानियां

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7 सितम्बर रविवार को भाद्रपद पूर्णिमा तिथि पर चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। शास्त्रों में ग्रहण का समय अत्यंत पवित्र एवं साधना–स्मरण का अवसर माना गया है। इस अवसर पर श्रद्धालुजन जप, ध्यान, दान और भगवान के नाम–स्मरण में लीन होकर अपने जीवन को धन्य बनाते हैं। स्वामी अमित शुक्ला ने बताया कि ग्रहण के समय भौतिक कार्यों से विरत रहकर आत्मकल्याण की साधना करनी चाहिए। विशेष रूप से अपने इष्ट देव एवं श्री वेंकटेश्वर स्वामी के नाम संकीर्तन विष्णुसहस्रनाम का पाठ मंत्र जप, दान और गंगा जल से स्नान का महत्व अधिक है। ग्रहणकाल में किया गया जप, दान और नाम संकीर्तन सहस्रगुना फल प्रदान करती है। चंद्र ग्रहण में सूतक 9 घंटे पहले माना जाता है। सूतक दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से प्रारंभ होगा। ग्रहण का समय प्रारंभ 9.57 पर होगा और ग्रहण समाप्त 1.27 पर होगा।

गर्भवती महिलाओं को ये सावधानियां रखनी चाहिए

गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार उन्हें विशेष सावधानी रखनी चाहिए। इस दौरान कुश और तुलसी-दल पास रखना, गाय के गोबर का लेपन करना भगवान का नाम-स्मरण करना शुभ माना गया है। घर में रखे अन्न, जल और पकवान पर कुश या तुलसी-दल रखें ताकि ग्रहण का दुष्प्रभाव न पड़े।

पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध, तर्पण

शुक्ला ने बताया कि पुराणों के अनुसार ग्रहण का सम्बन्ध समुद्र मंथन से है। जब देवताओं और असुरों ने मिलकर अमृत निकाला, तो अमृत पान के समय राहु नामक असुर ने छल से अमृत पी लिया। उसी समय सूर्यदेव और चन्द्रदेव ने राहु को पहचान लिया और भगवान विष्णु को संकेत किया कि यह असुर है। यह देख भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका मस्तक अलग कर दिया उसका सिर ‘राहु’ और धड़ ‘केतु’ कहलाया। तभी से जब-जब सूर्य या चन्द्रमा राहु–केतु की छाया में आते हैं, तब ग्रहण होता है। उन्होंने कहा 7 तारीख से ही श्राद्ध पक्ष भी आरंभ हो रहा है, अत: सूतक प्रारंभ होने से पहले ही पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध, तर्पण कर लें।