डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अमेरिकी सरकार की यह नई नीति ऑफिशियली जारी कर दी है, जिसमें चीन के सरकारी कर्मचारियों या चीनी नागरिकों के साथ रोमांस करने पर ‘हनी ट्रैप’ के चंगुल में फंसने का खतरा जताया गया है.
डोनाल्ड ट्रंप news -अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शपथ ग्रहण के बाद से ही लगातार एक के बाद एक नए फरमान जारी कर रहे हैं. अब उनका एक और नया फरमान सामने आया है, जिसमें अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों के चीन के सरकारी कर्मचारियों या चीनी नागरिकों के साथ रोमांस करने और सेक्स रिलेशन बनाने पर बैन लगा दिया गया है. ट्रंप के प्रशासन ने इस नई अमेरिकी नीति को ऑफिशियली जारी भी कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह नया फरमान अमेरिकी डिप्लोमैट्स, उनके परिवार के सदस्यों और सिक्योरिटी क्लियरेंस वाले गवर्नमेंट कॉन्ट्रेक्टर पर लागू होगा. हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि यह फरमान जनवरी में ही चीन में अमेरिकी राजदूत निकोलस बर्न्स ने चीनी सरकार द्वारा वहां से डिपोर्ट किए जाने से ठीक पहले लागू कर दिया था, जिसकी अब ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी नीति को तौर पर पुष्टि की है.
कहां-कहां के कर्मचारियों पर लागू होगा यह बैन
एसोसिएटड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नीति में उन अमेरिकी सैनिकों व सरकारी कर्मचारियों के चीनी नागरिकों से रोमांटिक या सेक्स रिलेशनशिप रखने पर बैन लगाया गया है, जो चीन में मौजूद किसी भी अमेरिकी मिशन में कार्यरत हैं. अमेरिका ने चीन की राजधानी बीजिंग में अपना दूतावास बना रखा है, जबि ग्वांगझू, शंघाई, शेनयांग, वुहान और हांग कांग में उसके महावाणिज्य दूतावास हैं. इन सभी में तैनात अमेरिकी कर्मचारी इस बैन के दायरे में आएंगे. इन कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों और संवेदनशील जानकारियों तक पहुंच वाले गवर्नमेंट कॉन्ट्रेक्टर पर भी यह बैन लागू होगा.
चीन से बाहर तैनात लोगों को मिलेगी छूट
रिपोर्ट में कहा गया है कि ये नए निर्देश उन अमेरिकी सैनिकों और कर्मचारियों पर लागू नहीं होंगे, जो चीन से बाहर तैनात हैं और चीनी नागरिकों के साथ इस प्रतिबंध के लागू होने से पहले ही किसी प्रकार की रिलेशनशिप में हैं. हालांकि उन्हें इस प्रतिबंध को स्वीकार करने से इनकार करने पर संबंध समाप्त करने या अपना पद छोड़ने में से एक विकल्प चुनने के लिए मजबूर कर सकता है. यह पॉलिसी सभी अमेरिकी सैनिकों व कर्मचारियों को इंटरनल कम्युनिकेशन में भेज दी गई है. इसे चीन और अमेरिका के बीच संबंधों में तनाव बढ़ने के नजरिये से देखा जा रहा है, जो हालिया सालों में ट्रेड, टेक्नोलॉजी और वैश्विक प्रभुत्व को लेकर आपस में टकराव की मुद्रा में रहे हैं.
कोल्ड वॉर टाइम की याद दिला रहे हैं ये नियम
अमेरिकी सरकार की इस नीति ने रूस के साथ चली ‘कोल्ड वॉर’ के युग की याद दिला दी है. कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि तब भी अमेरिकी सैनिकों पर सोवियत (अब रूस) नियंत्रण वाले इलाकों और चीन में तैनाती के दौरान ऐसे ही प्रतिबंध लगाए जाते थे. उस दौरान ऐसे सख्त नियम लागू करने का मकसद अमेरिकी डिप्लोमेट्स और सैनिकों को किसी भी तरह जासूसी या हनी ट्रैप वाले जाल से बचाना होता था. हालांकि साल 1991 में सोवियत संघ के कई देशों में बंटने पर इस नीति में राहत दे दी गई थी, लेकिन अब वॉशिंगटन का दोबारा इस नीति को लागू करना यह संकेत दे रहा है कि हालिया सालों में चीनी अधिकारियों पर इंटेलिजेंस बटोरने के लिए ऐसी गतिविधियों को अंजाम देने के आरोपों को अमेरिका सच माना जा रहा है.