पटना – बिहार की राजनीति में उस समय गर्मी आ गई, जब लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा हो रही थी। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) से इस बिल का समर्थन न करने को कहा है। उन्होंने जेडीयू के मुस्लिम नेताओं से कहा है कि अगर बिल पास हो गया तो उन्हें नीतीश कुमार का साथ छोड़ देना चाहिए। पीके का कहना है कि 2015 में नीतीश कुमार मुसलमानों की वजह से ही बिहार के मुख्यमंत्री बने थे और अगर मुस्लिम नहीं होते तो नीतीश कुमार की राजनीति खत्म हो जाती। पीके ने यह भी कहा कि अगर नीतीश कुमार वक्फ के खिलाफ वोट नहीं करते हैं तो खुद को गांधी और लोहिया का अनुयायी कहना गलत होगा।
जेडीयू पर खूब बरसे प्रशांत किशोर
पीके ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए वक्फ बिल को लेकर जेडीयू पर खूब हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर यह बिल संसद से पास होता है तो इसके लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) से ज्यादा नीतीश कुमार की पार्टी जिम्मेदार होगी। नीतीश कुमार के सांसदों को सदन में इस बिल पर वोट नहीं करना चाहिए। जेडीयू के मुस्लिम नेताओं को भी अपने सांसदों से यह कहना चाहिए कि वे वक्फ बिल के खिलाफ वोट करें।
जन सुराज वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ
पीके ने साफ कहा कि उनकी पार्टी जन सुराज वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ है। उनके अनुसार यह बिल सीधे तौर पर मुसलमानों को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि सरकार को मुस्लिम समुदाय को विश्वास में लिए बिना वक्फ कानून नहीं बनाना चाहिए, यह पूरी तरह से गलत होगा। संविधान में अल्पसंख्यकों को जो अधिकार दिए गए हैं, उनमें किसी भी तरह का बदलाव उस समाज की सहमति के बिना ठीक नहीं है।
2015 में मुसलमानों ने बनाया था सीएम
प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार को याद दिलाया कि 2015 में मुसलमानों ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए महागठबंधन को वोट दिया था। आज वक्फ बिल का समर्थन करके नीतीश कुमार और जेडीयू मुस्लिम समुदाय से किया वादा तोड़ रहे हैं। नीतीश कुमार को यह बात पता होनी चाहिए कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाने में मुसलमानों का भी बड़ा योगदान है।