तमिलनाडु में जल्लीकट्टू खेल के दौरान 7 लोग घायल, 650 लोगों ने खुद करवाया था रजिस्ट्रेशन

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तमिलनाडु 

दशकों पुरानी तमिलनाडु में जल्लीकट्टू प्रतियोगिता का आयोजन इस साल भी किया गया. हर बार इस खेल में बड़ी संख्या में लोग घायल होते हैं. कोरोना वायरस संक्रमण के कारण कुछ पाबंदियों के साथ 14 जनवरी गुरुवार को पोंगल के मौके पर इस खेल की शुरुआत हुई. पुलिस के अनुसार मदुरै के पालेमेडू में गुरुवार के दिन सांड को काबू करने के पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू में करीब 7 लोग घायल हो गए. घायलों को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल ले जाया गया.

पुलिस ने बताया कि लगभग 650 लोगों ने अखाड़े में बैलों को पकड़कर अपने कौशल का प्रदर्शन करने के लिए खुद को पंजीकृत करवाया था. इस आयोजन को तमिलनाडु के राजस्व और आपदा प्रबंधन और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री आरबी उदयकुमार ने हरी झंडी दिखाई थी.

जलीकट्टू और पोंगल में शामिल हुए राष्ट्रीय नेता

आयोजन के पहले दिन 14 जनवरी, गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पोंगल पर्व पर मदुरै में शामिल हुए.तमिल संस्कृति की सराहना के साथ कहा कि देश में इसे सम्मान की आवश्यकता है. चेन्नई में इस आयोजन में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत भी शामिल हुए. मोहन भागवत ने चेन्नई में पोंगल का त्योहार मनाया और गाय की पूजा की.

400 साल पुरानी है जल्लीकट्टू खेल की परंपरा

जल्लीकट्टू तमिलनाडु का चार सौ साल से भी पुराना पारंपरिक खेल है.जो फसलों की कटाई के अवसर पर आयोजित किया जाता है. खेल में लोग सांड (Bull) को काबू करने की कोशिश करते हैं. जल्लीकट्टू का शाब्दिक अर्थ होता है ‘सांड को गले लगाना’. ‘जल्ली’ का मतलब होता है सिक्का और ‘कट्टू’ का मतलब होता है बांधना.इसमें 300-400 किलो के सांड़ों की सींगों में सिक्के या नोट फंसाकर रखे जाते है. फिर उन्हें भड़काकर भीड़ में छोड़ दिया जाता है, ताकि लोग सींगों से पकड़कर उन्हें काबू में करें. इसमें काबू करने वाले व्यक्ति को एक निश्चित दूरी या सांड के तीन बार कूदने तक उसकी पीठ पर बने रहना होता है. इस दौरान कुछ खिलाड़ी सांड की चपेट में आने से घायल हो जाते हैं और कुछ की मौत हो जाती है.