उदंती सीतानदी , राजापडाव किसान संघर्ष समिति के हजारों ग्रामीणाें ने गरियाबंद कलेक्टर कार्यालय का किया घेराव

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मैनपुर, उदंती राजापडाव, गौरगांव , सीतानदी क्षेत्र से टैक्टर के माध्यम से हजाराें लोग पहुचें

गरियाबंद

शेख हसन खान

जिले के उदंती सीतानदी अभ्यारण्य एंव राजापडाव क्षेत्र में निवासरत हजारों ग्रामीणों ने आज सोमवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी पुरानी मांगो पर प्रशासन गंभीरता से विचार नही कर रहा है। जिसके चलते उनकी मांगे लंबित पड़ी है।

ग्रामीण ‘उदंती सीतानदी राजापड़ाव किसान मजदूर संघर्ष समिति’ के बैनर तले गरियाबंद पहुंचे। ग्रामीणों ने 14 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया और अपनी मांगे जल्द से जल्द पूरी करने की मांग की।

ग्रामीणों की 14 प्रमुख मांगो में सबसे प्रमुख मांग उदंती अभ्यारण्य क्षेत्र के गांवो में तेंदूपत्ता संग्रहण की अनुमति प्रदान करना, गांवो में फड़ी बनाना, तेंदूपत्ता और बूटा कटाई की राशि मे वृद्धि करना, वहां काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन बढ़ाना, आकस्मिक मृत्यु पर उचित मुआवजा राशि प्रदान करना, वनोपजों का मूल्य बढ़ाना, वनों के सरक्षण एवं संवर्धन की पूरी जिम्मेदारी वन समितियों को देना, 2005 से पूर्व काबिज भूमि का वन अधिकार पट्टा जारी करना, अभ्यारण्य एवं राजपडाव क्षेत्र में सड़क, बिजली पुल पुलिया की व्यवस्थाएं करना, भूतबेडा में हाई स्कूल और मक्का की खरीदी जनवरी फरवरी में शुरू करना शामिल है।

गौरतलब है कि उदंती अभ्यारण्य क्षेत्र में बसे कुछ गांवो को प्रशासन विस्थापित करना चाहता है। जिसके चलते उन गांवो में प्रशासनिक कार्यो की स्वीकृति नही दी जा रही है। वही ग्रामीण विस्थापन को तैयार नही है और अपने गांवो में ही मूलभूत एवं रोजगार मूलक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कर रहे है। ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर इससे पहले भी कई बार पदयात्रा और घेराव कर चुके है।

क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते आ रहे है मगर प्रशासन द्वारा उनकी मांगों को गम्भीरता से नही लिया गया जिसके चलते मांगे पूरी नही हुई। इन्ही मांगो को लेकर ग्रामीणों ने आज एक बार फिर पदयात्रा की और कलेक्ट्रेट का घेराव कर मांगे जल्द पूरी करने की बात प्रशासन के समक्ष रखी।

इस दौरान उदंती सीतानदी राजापडाव किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष अर्जुन सिंह नायक, क्षेत्र के वरिष्ठ आदिवासी नेता दलसूराम मरकाम, जिला पंचायत सभापति लोकेश्वरी नेताम, पूर्व जिला पंचायत सदस्य कांति मरकाम, ग्राम पंचायत कोकडी के सरपंच सखाराम मरकाम, ग्राम पंचायत अडगडी के सरपंच कृष्ण कुमार नेताम, शोभा सरपंच रमुला बाई मरकाम, गौरगांव सरपंच भानबाई नेताम, गरहाडीह के सरपंच कलाबाई नेताम, गोना सरपंच सुनिल कुमार मरकाम, भुतबेडा सरपंच अजय कुमार नेताम, कुचेंगा सरपंच कृष्णा बाई मरकाम, जांगडा सरपंच मिथुला बाई मरकाम, तौरेंगा सरपंच परमेश्वर नेताम, अमाड सरंपच पुस्तम सिंह, कोयबा के सरपंच बेलमती मांझी, साहेबिनकछार सरपंच कैलाश नेताम, जनपद सदस्य घनश्याम मरकाम, फुलचन्द्र नेताम, चिमन लाल, गणेराम, नकुल नागेश, संजय देवंशी , नरेन्द्र ध्रुव, इंदर ध्रुव, रूपसिंह मरकाम, टीकम नागवंशी, सहित क्षेत्र के वरिष्ठ समाज प्रमुखों ने बताया कि उदंती सीतानदी अभ्यारण्य क्षेत्र के कोर ऐरिया में ग्रामीणाें को न तो तेन्दुपत्ता तोडने दिया जाता है और न ही किसी भी प्रकार के वनोपज संग्रहण करने दिया जाता है, जिसके चलते उदंती सीतानदी अभ्यारण्य क्षेत्र के कोर क्षेत्र में निवास करने वाले हजाराें लोगो के सामने अपने जीवीकाउपार्जन को लेकर गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है, और तो और इन कोर ईलाकों के गांव में सडक, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे बुनियादी सुविधाए भी उपलब्ध नही कराये जा रहे है, जब भी सडक और बिजली लगाने की बात आती है, और सडक निर्माण का तो वन विभाग द्वारा रोक लगा दिया जाता है, जिसके चलते इन ग्रामो में बुनियादी सुविधाए उपलब्ध नही हो पा रहा है, और दुसरी तरफ वन विभाग नियम विपरित अपने निर्माण कार्यो को जेसीबी मशीन के माध्यम से करवाते है, यहा निवास करने वाले आदिवासी और हजाराें लोगो को नियम कानून बताते है, और वन प्रशासन खूद उन नियमों को ताक मे रखकर अपना निर्माण कार्य करवा लेते है।