सुप्रीम कोर्ट से मोदी सरकार को झटका, कृषि कानूनों के अमल पर लगाई अंतरिम रोक

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इससे पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कृषि कानूनों के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन पर कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि आपने इस मामले को सही से हैंडल नहीं किया।

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट से नरेंद्र मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने अगले आदेश तक कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने साथ ही इस मुद्दे के समाधान के लिए कमिटी गठित करने का आदेश पारित कर दिया है। समस्या के समाधान के लिए अब कमिटी बातचीत करेगी। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों से तीखे सवाल पूछे थे।

केंद्र ने कहा- आंदोलन में खालिस्तानी कर रहे हैं मदद
चीफ जस्टिस ने पूछा हमारे पास एक आवेदन है जिसमें कहा गया है कि प्रतिबंधित संगठन इस प्रदर्शन में मदद कर रहे हैं। क्या अटॉर्नी जनरल इसे मानेंगे या इनकार करेंगे। इसपर अटॉर्नी जनरल जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा हमने कहा था कि प्रदर्शन में खालिस्तानियों की घुसपैठ है। इसपर कोर्ट ने कहा कि ऐसा है तो ऐसे में केंद्र सरकार कल तक हलफनामा दे। जवाब में अटॉर्नी जनरल हम हलफनामा देंगे और आईबी रेकॉर्ड भी देंगे।

तो अब रामलीला मैदान में होगा प्रदर्शन!

किसान संगठनों के वकील विकास सिंह ने कहा कि किसान प्रदर्शन स्थल से उस जगह जा सकते हैं जहां से प्रदर्शन दिखे। अन्यथा प्रदर्शन का मतलब नहीं रह जाएगा। रामलीला मैदान दिया जाए प्रदर्शन के लिए। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रामलीला मैदान या कहीं और पर प्रदर्शन के लिए पुलिस कमिश्नर से किसान इजाजत के लिए आवेदन दे सकते हैं ऐसा हम ऑर्डर करेंगे।

कानून को निलंबित करने की योजना है पर..
चीफ जस्टिस एस ए बोबडे ने कहा कि कमिटी इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा होगी। हम कृषि कानून को निलंबित करने की योजना बना रहे हैं, लेकिन अनिश्चितकाल के लिए नहीं।

पीएम क्यों नहीं करते बात, CJI ने यह कहा
किसान संगठनों की तरफ पेश वकील एमएल शर्मा ने कहा कि किसानों ने कहा कि कई लोग बातचीत के लिए आए हैं लेकिन मुख्य व्यक्ति प्रधानमंत्री नहीं आए हैं। इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि हम पीएम को बातचीत करने के लिए नहीं कह सकते हैं। वह इस मामले में पार्टी नहीं हैं।NB