शारदीय नवरात्र का हुआ शंखनाद, बिखरी धूप-अगरबत्ती की सुगंध

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रायपुर

नवरात्रि के पहले दिन मंदिर में भक्त पहुंचे। शहर के देवी मंदिरों में सुबह 11:36 अभिजीत मुहूर्त से पूजा शुरू हुई, जो दोपहर 12:30 तक चली। वहीं, राजधानी के पंडालों पर देर शाम तक मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित हुई।

महामाया मंदिर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए भक्त

पुरानी बस्ती स्थित महामाया मंदिर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए भक्तों ने परिसर से ही माता के दर्शन किए। मंदिर का मुख्य द्वार बंद होने से भक्तों ने दूर से माता की आरती की। महामाया मंदिर के पुजारी मनोज शुक्ला ने बताया, अभिजीत मुहूर्त शुरू हाेते ही पूजा प्रारंभ हुई, जो क्रंमश: चलती रही।

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शारदीय नवरात्रि के पहले दिन शनिवार को शहर के मंदिर, पूजा पंडाल और श्रद्धालुओं ने अपने-अपने घरों में कलश स्थापना की और मां दुर्गा का आह्वान शुरू किया। कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष घर में देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों की संख्या अधिक है। नवरात्रि के पहले दिन से ही शहर और आसपास के क्षेत्रों में चंडीपाठ के साथ दुर्गा सप्तशति के श्लोक गूंजने लगे हैं। कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष दुर्गा पूजा के दौरान शहर में ना कोई बड़ा व भव्य पंडाल बन रहा है और ना कहीं देवी की भव्य व आकर्षक प्रतिमा स्थापित की जा रही है। सरकारी गाइडलाइन के तहत लौहनगरी में दुर्गोत्सव के दौरान कहीं भी मेले का आयोजन नहीं किया जा रहा है। 

आकाशवाणी स्थित काली माता मंदिर में भी देर रात तक भक्तों की मौजूदगी रही। यहां भक्तों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए माता के दर्शन किए। रविवि स्थित बंजारी मंदिर के पुजारी रवि तिवारी ने बताया, मंदिर में 12 बजे विधिवत घटों की स्थापना हुई। इस दौरान केवल मंदिर समिति के सदस्य ही उपस्थित रहे।

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माँ माहमाया मंदिर रायपुर

माता का विशेष श्रृंगार कर महाआरती हुई। रावणभाटा स्थित बंजारी धाम में भी भक्त दर्शन करने पहुंचे। पुजारी हरीष भाई जोशी ने बताया, भक्तों को मंदिर के भीतर प्रवेश नहीं दिया गया। सोशल डिस्टेंसिंग से साथ दूर से ही माता की पूजा व दर्शन किया।